11 lines · 136 words · 1:00 read aloud
बंटी की चालाकी
गर्मियों का दिन था। सूरज तेज़ जल रहा था। बंटी चिड़िया को बहुत प्यास लगी थी।
बंटी ने एक मिट्टी का घड़ा देखा। उसमें बस थोड़ा सा पानी था, बिल्कुल नीचे।
बंटी ने घड़े के पास उड़कर पानी पीने की कोशिश की, लेकिन पानी बहुत नीचे था।
बंटी ने ज़मीन पर पड़े छोटे-छोटे कंकड़ देखे। उसे एक तरकीब सूझी।
वह एक-एक कंकड़ चोंच में उठाकर घड़े में डालने लगी।
धीरे-धीरे पानी ऊपर आ गया। बंटी खुशी से चहचहाई।
बंटी ने झुककर घड़े से पानी पिया। उसकी प्यास बुझ गई।
शाम हुई। धूप नरम पड़ गई और हवा ठंडी हो गई।
बंटी ने घड़ा वहीं छोड़ दिया और पंख फड़फड़ाए।
रात गहरी हो गई। सितारे चमकने लगे। बंटी नींद के लिए तैयार हो गई।
बंटी अपने घोंसले में सिमटकर सो गई। आज का दिन बहुत अच्छा था।



